गाजियाबाद (मोदीनगर): उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं का गुस्सा अब सड़कों पर फूटने लगा है। शनिवार को मोदीनगर में तहसील दिवस के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गांव बेगमाबाद की दर्जनों महिलाओं ने स्मार्ट मीटर के विरोध में मोर्चा खोल दिया। तहसील परिसर में नारेबाजी करने के बाद आक्रोशित महिलाओं ने सड़क पर उतरकर जाम लगा दिया, जिससे काफी देर तक आवागमन बाधित रहा।
“पैसे डालते रहो, पारदर्शिता कहीं नहीं”
प्रदर्शन कर रही महिलाओं का सीधा आरोप है कि बिजली विभाग द्वारा लगाए गए स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए सुविधा कम और मुसीबत ज्यादा साबित हो रहे हैं। महिलाओं ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा:
बार-बार रिचार्ज: महिलाओं का कहना है कि उन्हें बार-बार मीटर रिचार्ज कराना पड़ता है, लेकिन पैसे कहाँ और कैसे खर्च हो रहे हैं, इसकी कोई पारदर्शिता नहीं है।
ऐप की समस्या: विभाग का मोबाइल ऐप अक्सर काम नहीं करता, जिससे बैलेंस और रीडिंग की सही जानकारी नहीं मिल पाती।
बजट पर असर: घरेलू महिलाओं का कहना है कि इस नई व्यवस्था ने उनके घर का बजट बिगाड़ दिया है।
तहसील दिवस पर अधिकारियों को घेरा
तहसील दिवस पर अपनी शिकायत लेकर पहुंची महिलाओं ने अधिकारियों के सामने जमकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि बिजली विभाग सिर्फ पैसे वसूलने पर ध्यान दे रहा है, जबकि तकनीकी खामियों के कारण जनता परेशान है। शिकायत सुनने के बाद अधिकारियों ने महिलाओं को समझा-बुझाकर सड़क से हटाया और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि स्मार्ट मीटर की इन खामियों को जल्द दूर नहीं किया गया और पुराने मीटरों जैसी पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हुई, तो वे और भी बड़ा आंदोलन करने को विवश होंगे।
बाइट (महिला पीड़ित): “हमें नहीं पता चल रहा कि पैसा कहाँ जा रहा है। ऐप खुलता नहीं और मीटर अचानक बंद हो जाता है। यह सरकार की कैसी डिजिटल व्यवस्था है जो गरीबों को अंधेरे में रख रही है?”
