वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, ईरान ने अपने बम बनाने योग्य यूरेनियम के विशाल भंडार को सुरक्षित करने के लिए एक आक्रामक रणनीति अपनाई है। ईरान ने उन भूमिगत सुरंगों को जानबूझकर ढहा दिया है, जिनमें यह संवेदनशील सामग्री रखी गई थी, साथ ही प्रवेश द्वारों पर बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं।
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की अटकलों के बीच ईरान का कदम
यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई या यूरेनियम भंडार को जब्त करने के आदेश दिए जाने की चर्चाएं तेज थीं। राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ने देगा। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने और क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात के बीच, ईरान की इस किलेबंदी ने अमेरिका की रणनीतिक योजनाओं को उलझा दिया है।
समझौते की उम्मीदों को गहरा झटका
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की इस ‘कूटनीतिक चाल’ ने उस संभावित समझौते को लगभग नामुमकिन बना दिया है, जिसके तहत तेहरान को अपना 500 किलोग्राम से अधिक बम-ग्रेड यूरेनियम अमेरिका या अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को सौंपना था। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने स्वीकार किया है कि अब इस सामग्री को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद खतरनाक और तकनीकी रूप से लगभग असंभव हो गया है।
क्या है ईरान की रणनीतिक चाल?
परमाणु विशेषज्ञों के अनुसार, यह ईरान की एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति हो सकती है। NNSA के पूर्व अधिकारी स्कॉट रोएकर ने इसे एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि:
ईरान भविष्य में यह दावा कर सकता है कि सुरंगें ध्वस्त होने के कारण यूरेनियम का कुछ हिस्सा बाहर निकालना संभव नहीं है।
इससे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और अमेरिका कभी यह सुनिश्चित नहीं कर पाएंगे कि ईरान ने अपना पूरा भंडार सौंप दिया है या उसका कुछ हिस्सा गुप्त रूप से छिपाकर रखा गया है।
भविष्य के लिए बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या भविष्य में कोई लिखित समझौता होने पर भी इस जमीन के नीचे दफन घातक यूरेनियम को कौन और कैसे निकालेगा? ईरान की इस किलेबंदी ने परमाणु वार्ताओं को एक ऐसे चक्रव्यूह में डाल दिया है, जिससे बाहर निकलना अब केवल कूटनीति से संभव नहीं लग रहा।
