भारतीय सेना का ‘भारतीयकरण’: यूनिफॉर्म में बड़े बदलाव, ‘बंदी जैकेट’ को मिली मंजूरी और हटाए गए औपनिवेशिक शब्द

भारतीय सेना का ‘भारतीयकरण’: यूनिफॉर्म में बड़े बदलाव, ‘बंदी जैकेट’ को मिली मंजूरी और हटाए गए औपनिवेशिक शब्द

नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अपनी गौरवशाली परंपराओं को आधुनिकता और भारतीय संस्कृति के साथ जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सेना ने 174 पन्नों का नया मैनुअल ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ जारी किया है, जिसमें औपनिवेशिक काल की बची-खुची परंपराओं को समाप्त कर उन्हें भारतीय पहचान देने पर जोर दिया गया है।

क्या हैं बड़े बदलाव?

बंदी जैकेट को मंजूरी: पहली बार अधिकारियों को औपचारिक मौकों पर बंद-गले वाली ‘बंदी जैकेट’ पहनने की अनुमति दी गई है। यह जैकेट फॉर्मल ट्राउजर और बंद जूतों के साथ पहनी जाएगी। महिला अधिकारियों के लिए साड़ी या कुर्ता-सलवार के साथ गरिमापूर्ण परिधानों को स्वीकृति दी गई है।
पाउच बेल्ट की अनिवार्यता खत्म: सेना ने ‘मेस ड्रेस नंबर 5’ और ‘नंबर 6’ से पाउच बेल्ट को हटा दिया है। हालांकि, कुछ विशिष्ट रेजिमेंट्स में इसे विशेष कार्यक्रमों के दौरान जारी रखा गया है।
औपनिवेशिक शब्दों का विलोपन: सेना की कार्यप्रणाली और संबोधन से ‘रॉयल’ जैसे औपनिवेशिक शब्दों को पूरी तरह हटा दिया गया है।
नई विंटर यूनिफॉर्म: सभी रैंक के सैनिकों के लिए ‘3बी’ नामक नई विंटर यूनिफॉर्म शुरू की गई है, जिसमें अंगोला शर्ट और बैटल जैकेट शामिल हैं।

अनुशासन और आचरण पर सख्ती
नए नियमों के तहत सैनिकों के व्यक्तित्व और यूनिफॉर्म के प्रति सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं:
टैटू और एक्सेसरीज: यूनिफॉर्म के साथ किसी भी प्रकार के ब्रेसलेट या धार्मिक प्रतीकों पर रोक है (सिख सैनिकों को छूट जारी रहेगी)। केवल पूजा का पवित्र धागा पहनने की अनुमति होगी।
ग्रूमिंग और कॉस्मेटिक्स: मूंछों की लंबाई 12 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। यूनिफॉर्म में परफ्यूम पर प्रतिबंध है, लेकिन आफ्टर-शेव लोशन की अनुमति है। महिला सैनिकों के लिए कॉस्मेटिक्स के उपयोग को लेकर भी सख्त नियम हैं; जैसे कि लिपस्टिक और नेल पॉलिश की अनुमति नहीं होगी। सिंदूर लगाने की अनुमति है, बशर्ते वह कैप या बेरेट के अंदर छिपा रहे।

क्यों किए गए ये बदलाव?
सेना के एडजुटेंट जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक ने मैनुअल की प्रस्तावना में स्पष्ट किया है कि ये परिवर्तन देश की संप्रभु पहचान और भारतीय सोच को मजबूत करने के लिए किए गए हैं। यह बदलाव भारतीय सेना की परंपराओं को हमारी अपनी संस्कृति के अनुरूप ढालने का एक प्रगतिशील कदम है।

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