
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों चर्चाओं के केंद्र में है। पार्टी के भीतर ‘अंदरूनी कलह’ और ममता बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ एक ‘अलग गुट’ बनने की अटकलें जोरों पर हैं। इसी बीच, बहरामपुर से TMC सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान की लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है।
क्या हैं सियासी अटकलें?
यूसुफ पठान की ओम बिरला से मुलाकात को राजनीतिक गलियारों में महज एक ‘शिष्टाचार भेंट’ से कहीं अधिक देखा जा रहा है। विपक्षी दलों का दावा है कि बंगाल की राजनीति में कुछ बड़ा पक रहा है। वहीं, पार्टी के कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी और उनकी गतिविधियां भी इन कयासों को हवा दे रही हैं। हालांकि, TMC की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक चौपालों तक ‘खेला’ होने की चर्चाएं आम हैं।
क्या बंगाल में बड़े बदलाव के हैं संकेत?
पश्चिम बंगाल की राजनीति का इतिहास रहा है कि यहां चुनावी सरगर्मी से पहले बड़े उलटफेर होते रहे हैं। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के समर्थकों के बीच ‘पावर सेंटर’ की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि, ममता बनर्जी हमेशा से अपनी पार्टी पर मजबूत पकड़ बनाए रखने में कामयाब रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
यूसुफ पठान की मुलाकात एक संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है, जिसे बेवजह सियासी रंग दिया जा रहा है।
भाजपा राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में इन स्थितियों का लाभ उठाने की ताक में है।
TMC के भीतर टिकटों के बंटवारे या आगामी रणनीतियों को लेकर संभावित असंतोष को ‘बगावत’ के रूप में पेश किया जा रहा है।
निष्कर्ष
क्या पश्चिम बंगाल में वास्तव में कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव होने वाला है? यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। TMC की संगठनात्मक मजबूती और ममता बनर्जी का करिश्मा अब भी पार्टी को एकजुट रखने में सक्षम है। लेकिन, विपक्षी खेमे में जारी ये अटकलें आने वाले समय में राज्य की राजनीति को दिलचस्प जरूर बना रही हैं।

