ग्रेटर नोएडा वेस्ट जमीन फर्जीवाड़ा
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में करीब 72 हजार वर्ग मीटर जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में न्यायालय के आदेश पर थाना सेक्टर-20 में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में पूर्व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण GM रवीन्द्र तोंगड़ समेत कुल 11 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।एफआईआर में CRC ग्रुप के तीन निदेशकों कुणाल भल्ला, सतीश गर्ग और हिमांशु गोयल के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा रवीन्द्र तोंगड़ की पत्नी कुशल सिंह का नाम भी आरोपी के तौर पर दर्ज किया गया है।
जमीन हड़पने और करोड़ों रुपये के गबन के आरोप
शिकायत के मुताबिक आरोपियों पर जमीन हड़पने, करोड़ों रुपये की रकम के कथित गबन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और शिकायतकर्ता को धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। करीब 5 करोड़ रुपये की देनदारी और रकम के कथित गबन का भी आरोप है।
मामले में कंपनी की 73 प्रतिशत हिस्सेदारी को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार वर्ष 2013 और 2014 में करीब 20 हजार और 14 हजार वर्ग मीटर जमीन की सब-लीज से जुड़े लेनदेन किए गए।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट जमीन फर्जीवाड़ा में रिश्तेदारों को निदेशक बनाकर सब-लीज कराने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व GM के रिश्तेदारों को कंपनी में निदेशक बनाकर जमीन की सब-लीज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसके बाद वर्ष 2018 में कथित फर्जी सब-लीज वाली जमीन पर CRC ग्रुप के साथ नई परियोजना शुरू किए जाने का भी आरोप है।
परियोजना के लिए बैंक लोन लेने और अन्य कारोबारी कार्यों में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी एफआईआर में कही गई है। कंपनी की बैलेंस शीट और अन्य अभिलेखों में रकम की कथित हेराफेरी के आरोप भी लगाए गए हैं।
दिसंबर 2025 में धमकी देने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि दिसंबर 2025 में हिसाब-किताब को लेकर उसे धमकी दी गई। इसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई के लिए न्यायालय का रुख किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद थाना सेक्टर-20 पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस दस्तावेजों और बैंक लेनदेन की करेगी जांच
मामले की जांच थाना सेक्टर-20 के उपनिरीक्षक जितेन्द्र सिंह कर रहे हैं। पुलिस जमीन से जुड़े दस्तावेज, सब-लीज के कागजात, कंपनी के रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच करेगी।
पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। एफआईआर में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
उपनिरीक्षक जितेन्द्र सिंह कर रहे जांच
थाना सेक्टर-20 के उपनिरीक्षक जितेन्द्र सिंह को मामले की जांच सौंपी गई है। पुलिस जमीन के दस्तावेज, सब-लीज रिकॉर्ड, कंपनी के अभिलेख, बैंक लेनदेन और अन्य संबंधित दस्तावेजों को जांच में शामिल करेगी।
फिलहाल एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। नामजद आरोपियों का पक्ष और मामले में आगे होने वाली पुलिस कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी।
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न्यायालय के आदेश के बाद थाना सेक्टर-20 पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच उपनिरीक्षक जितेन्द्र सिंह द्वारा की जा रही है। पुलिस अब जमीन से संबंधित मूल दस्तावेजों, सब-लीज रिकॉर्ड, कंपनी के अभिलेख, बैलेंस शीट, बैंक लेनदेन और परियोजना से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जमीन की सब-लीज किस प्रक्रिया के तहत हुई, संबंधित दस्तावेजों की वैधता क्या थी और कंपनी तथा जमीन से जुड़े वित्तीय लेनदेन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं।
फिलहाल एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। मामले में नामजद आरोपियों का पक्ष और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।



