नोएडा: सेक्टर-150 में 16 जनवरी की रात पानी से भरे खुले गड्ढे में कार गिरने से हुई इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच कर रही एसआईटी (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) स्तर पर गंभीर लापरवाही को हादसे का मुख्य जिम्मेदार माना है। रिपोर्ट के आधार पर तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
क्या था मामला?
16 जनवरी की रात को सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता अपनी कार से घर लौट रहे थे। सेक्टर-150 के पास सड़क पर एक गहरा गड्ढा खुदा हुआ था जो बारिश के पानी से भरा था। गड्ढे के पास न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। अंधेरा होने के कारण युवराज की कार सीधे उस गहरे गड्ढे में जा गिरी और कार के डूबने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
SIT जांच में खुली लापरवाही की पोल
हादसे के 100 दिन पूरे होने पर आई एसआईटी रिपोर्ट ने पुलिस विभाग के भीतर की कमियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंट्रोल रूम को उस खतरनाक गड्ढे के बारे में पहले से सूचना थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। इस आधार पर निम्नलिखित अधिकारियों को दोषी पाया गया है:
ऐशपाल सिंह: एआरओ (असिस्टेंट रेडियो ऑफिसर)
देवेंद्र शर्मा: आरएसआई (रिजर्व सब इंस्पेक्टर)
इसके अलावा एक अन्य पुलिसकर्मी को भी दोषी मानकर निलंबित किया गया है।
इन तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
अथॉरिटी और ट्रैफिक विभाग की भूमिका पर अब भी सवाल
भले ही पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है, लेकिन इस कार्रवाई ने नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) और ट्रैफिक विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों और परिजनों का पूछना है कि:
· सड़क के बीचों-बीच खुला गड्ढा किसकी अनुमति से खुदा था?
· सुरक्षा मानकों (बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर) की अनदेखी करने वाले ठेकेदार और अथॉरिटी के अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
· ट्रैफिक पुलिस ने उस ब्लैक स्पॉट को चिन्हित कर उसे सुरक्षित क्यों नहीं कराया?
निष्कर्ष: युवराज मेहता की मौत ने शहर की इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा पर एक काला धब्बा लगा दिया है। पुलिसकर्मियों का निलंबन न्याय की दिशा में पहला कदम तो हो सकता है, लेकिन असली जवाबदेही उन विभागों की है जिनकी लापरवाही के कारण सड़क पर ‘मौत का गड्ढा’ अस्तित्व में आया।
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