लखनऊ: CM योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान, कहा- “भारत धर्मशाला नहीं, यहाँ आस्था और संस्कारों का सम्मान अनिवार्य”

लखनऊ: CM योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान, कहा- “भारत धर्मशाला नहीं, यहाँ आस्था और संस्कारों का सम्मान अनिवार्य”

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित सेवा अस्पताल परिसर में आयोजित 9 दिवसीय रामकथा के समापन समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रवाद और सामाजिक एकता पर जोर दिया। तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा वाचित इस कथा के समापन अवसर पर सीएम योगी ने दो-टूक कहा कि भारत के प्रति निष्ठा और भारतीय संस्कारों का सम्मान न करने वालों के लिए देश में कोई स्थान नहीं है।

“भारत धर्मशाला नहीं, आस्था सर्वोपरि”
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग भारत के प्रति आस्था नहीं रखते और संस्कारों का अपमान करते हैं, उनके लिए यह देश ‘धर्मशाला’ नहीं हो सकता। उन्होंने प्रभु श्रीराम के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन्होंने श्रीराम से द्रोह किया, उन्हें अंततः कहीं जगह नहीं मिली।

‘लव और लैंड जिहाद’ के खिलाफ एकजुटता का आह्वान
सीएम योगी ने ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के प्रति समाज को सचेत करते हुए कहा कि इसके विरुद्ध सबको एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि समाज को तोड़ने वाली ताकतें जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर भेद पैदा करने की कोशिश करती हैं, लेकिन संत शक्ति के मार्गदर्शन में देश निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से ‘लैंड जिहाद’ का जिक्र करते हुए कहा कि मारीच, खर-दूषण और सुबाहु जैसे चरित्र भी लैंड जिहाद से ही जुड़े थे, जो जबरन जमीनों पर कब्जा करते थे। उन्होंने कहा कि खाली जमीनों पर अवैध रूप से तंबू गाड़ने की प्रथा को हर हाल में बंद करना होगा।

राम मंदिर आंदोलन और स्वामी रामभद्राचार्य का योगदान
रामजन्मभूमि आंदोलन को याद करते हुए सीएम योगी ने कहा कि 491 वर्षों के संघर्ष के बाद 2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। उन्होंने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिए गए साक्ष्य और वक्तव्य अत्यंत प्रभावशाली थे। कोर्ट के न्यायमूर्तियों ने भी उनके तर्कों को सुनकर सनातन धर्म के साथ हुए सदियों के अन्याय को महसूस किया।

स्वामी रामभद्राचार्य की साधना राष्ट्र के लिए कल्याणकारी
मुख्यमंत्री ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के जीवन संघर्ष और उनकी विद्वता की सराहना की। उन्होंने कहा कि रामभद्राचार्य जी ने कठिन साधना के बल पर न केवल बाधाओं को तोड़ा, बल्कि समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने स्वामी रामभद्राचार्य के आगामी छह महीने के एकांतिक साधना (एकांतवास) के लिए प्रस्थान पर उनके सफल और मंगलकारी होने की कामना की।

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