नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर सैकड़ों लोगों को चूना लगाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह रूस, तुर्की और अजरबैजान जैसे देशों में आकर्षक नौकरी का झांसा देकर भोले-भाले लोगों से लाखों की ठगी करता था। पुलिस ने इस मामले में बिहार और उत्तर प्रदेश के रहने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
ऐसे जाल में फंसाते थे शिकार
डीसीपी क्राइम ब्रांच पंकज कुमार के मुताबिक, इंस्पेक्टर संजय कौशिक के नेतृत्व वाली टीम ने इस पूरे नेक्सस का खुलासा किया। गिरोह के सदस्य फेसबुक और व्हाट्सएप पर विदेशी नौकरियों के लुभावने विज्ञापन पोस्ट करते थे। जब कोई व्यक्ति संपर्क करता, तो ये आरोपी उनसे असली पासपोर्ट कूरियर के जरिए मंगवा लेते और फिर उस पर फर्जी वीजा स्टैंप लगा देते थे। पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए ये नकली एयर टिकट और फर्जी ऑनलाइन वेरिफिकेशन लिंक भी भेजते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की कुंडली
पुलिस ने जिन तीन लोगों को पकड़ा है, उनकी पहचान इस प्रकार है:
सलाउद्दीन मंसूरी उर्फ हैदर खान (बिहार): यह गिरोह का मुख्य चेहरा था। खुद को एक फर्जी कंपनी ‘सबा एंटरप्राइजेज’ का HR मैनेजर बताकर लोगों को फंसाता था। पुलिस ने इसके पास से ‘हैदर खान’ के नाम का फर्जी आधार कार्ड और पीड़ितों के पासपोर्ट बरामद किए हैं।
कौशर (कुशीनगर, यूपी): इसका काम बिहार, बंगाल और यूपी से ऐसे लोगों को ढूंढना था जो विदेश जाना चाहते हों। इसने करीब 9 लोगों को ठगने की बात कबूली है।
मोहम्मद शहजाद (गाजियाबाद): यह एजेंट के तौर पर काम करता था और ठगी की रकम को आपस में बांटने का जिम्मा संभालता था।
बरामदगी और पुलिस कार्रवाई
एसीपी अशोक शर्मा की देखरेख में गठित टीम ने पीतमपुरा के पास जाल बिछाकर इन तीनों को गिरफ्तार किया। पुलिस को इनके पास से:
5 असली भारतीय पासपोर्ट (पीड़ितों के)
7 मोबाइल फोन (जिनमें फर्जी वीजा और जॉब लेटर के स्क्रीनशॉट हैं)
9 डेबिट और प्रीपेड कार्ड
नकदी और फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं।
मास्टरमाइंड ‘मुन्ना’ की तलाश जारी
पूछताछ में सामने आया कि सलाउद्दीन पहले नोएडा की कंपनियों में काम करता था, लेकिन जल्दी अमीर बनने के लालच में वह मास्टरमाइंड मोहम्मद मुन्ना के गैंग में शामिल हो गया। फिलहाल दिल्ली पुलिस इस गिरोह के सरगना मुन्ना की तलाश में छापेमारी कर रही है। कोर्ट ने तीनों आरोपियों को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के शिकार हुए अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।

