गाज़ीपुर। जनपद की एक अदालत ने एक दिल दहला देने वाले हत्याकांड में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ‘कलयुगी मामा’ अमजद खान को फांसी की सजा सुनाई है। अमजद पर अपने 4 वर्षीय सगे भांजे की गला काटकर बेरहमी से हत्या करने का दोष सिद्ध हुआ था। सजा सुनाते समय अपराधी का रुख देख अदालत और वहां मौजूद लोग भी स्तब्ध रह गए।
जज के सवाल पर अपराधी की हैरतअंगेज प्रतिक्रिया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फैसला सुनाने से ठीक पहले जज शक्ति सिंह ने आरोपी अमजद खान से एक सीधा सवाल किया- “अगर तुमको छोड़ दिया जाए, तो तुम क्या करोगे?” इस पर अमजद ने जो जवाब दिया, वह किसी को भी चौंकाने वाला था। उसने निडर होकर कहा, “अगर कोई मुझसे उलझेगा, तो मैं उसकी भी हत्या कर दूंगा।”
इतना ही नहीं, जब जज ने पूछा कि क्या उसे अपने किए पर कोई पछतावा है, तो अपराधी ने साफ तौर पर कहा कि उसे बिल्कुल भी पछतावा नहीं है। अपराधी की इस क्रूरता और पछतावे की कमी को देखते हुए जज ने उसे मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई।
“जब तक मौत न हो जाए…”
न्यायाधीश शक्ति सिंह ने अपने फैसले में स्पष्ट निर्देश दिए कि दोषी को तब तक फांसी के फंदे पर लटकाया जाए, जब तक कि उसकी मृत्यु न हो जाए। न्यायिक परंपरा का पालन करते हुए, फैसला लिखने के बाद जज ने अपनी पेन की निब (nib) भी तोड़ दी।
क्या था मामला?
गाज़ीपुर के इस मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। आरोपी अमजद खान ने महज 4 साल के अपने मासूम भांजे की गला रेतकर नृशंस हत्या कर दी थी। मृतक पक्ष के अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने बताया कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (rarest of rare) मामला मानते हुए आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है।
यह फैसला उन अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाओं को अंजाम देते हैं।
