नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के विकास के लिए तैयार की गई ‘क्षेत्रीय योजना-2041’ (Regional Plan-2041) का ब्लूप्रिंट अब पूरी तरह तैयार है। NCR प्लानिंग बोर्ड की 42वीं बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना पर मुहर लग गई है। इस योजना का उद्देश्य न केवल दिल्ली का बोझ कम करना है, बल्कि पूरे क्षेत्र को आधुनिक, प्रदूषण मुक्त और बेहतर कनेक्टिविटी वाला बनाना है।
क्या है NCR की ‘क्षेत्रीय योजना-2041’?
बढ़ती आबादी और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए यह मास्टर प्लान तैयार किया गया है। अनुमान है कि 2041 तक NCR की आबादी लगभग 14.73 करोड़ तक पहुंच जाएगी। इस विशाल आबादी को आवास, रोजगार, पानी और परिवहन की बेहतर सुविधाएं देने के लिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के प्रतिनिधियों ने मिलकर यह खाका तैयार किया है।
मुख्य आकर्षण: 4 नई ‘नमो सिटीज’
योजना की सबसे बड़ी घोषणा 4 नई ‘सेमी-ग्रीनफील्ड नमो सिटीज’ को बसाना है।
कनेक्टिविटी: ये शहर नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर के आसपास विकसित किए जाएंगे।
सुविधाएं: इन शहरों में आधुनिक आवास, बड़े रोजगार केंद्र और विश्व स्तरीय सार्वजनिक परिवहन पर जोर होगा।
बजट: केंद्र सरकार ने इनके विकास के लिए 5000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना प्रस्तावित की है, जिसमें ऋण और वित्तीय सहायता दी जाएगी।
30 मिनट में सफर का लक्ष्य
’30 मिनट NCR’ के लक्ष्य को पूरा करने के लिए परिवहन नेटवर्क को हाई-टेक बनाया जा रहा है। मेट्रो, नमो भारत ट्रेन और एक्सप्रेस-वे को इस तरह जोड़ा जाएगा कि प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय न्यूनतम हो सके।
पर्यावरण सुधार और प्रदूषण पर लगाम
बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ‘क्षेत्रीय योजना-2041’ में दो प्रमुख स्तंभ तय किए गए हैं:
PARIVARTAN योजना: इसके तहत पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर BS-VI, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही, पुराने वाहन बदलने वालों को प्रोत्साहन भी दिया जा सकता है।
ग्रीन NCR: सड़क किनारे, रेलवे लाइनों और नहरों के खाली हिस्सों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा।
NCR की सीमा में कोई बदलाव नहीं
बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि NCR की मौजूदा भौगोलिक सीमा में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। 55 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र का मौजूदा स्वरूप ही बरकरार रहेगा, लेकिन इसके भीतर विकास की रफ्तार को कई गुना बढ़ाया जाएगा।
भविष्य की राह: पानी और संसाधन
बढ़ती आबादी के लिए पानी का प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती है। योजना में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन) और वेस्ट वॉटर को दोबारा उपयोग (Recycle) करने पर विशेष नीति तैयार की जा रही है।
