बड़े बिल्डरों पर शिकंजा: अंसल इंफ्रास्ट्रक्चर और जेपी ग्रुप के घोटालों की जांच करेगी CBI, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

बड़े बिल्डरों पर शिकंजा: अंसल इंफ्रास्ट्रक्चर और जेपी ग्रुप के घोटालों की जांच करेगी CBI, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

नई दिल्ली/लखनऊ: देश के नामी बिल्डरों—अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (APIL) और जेपी ग्रुप (Jaypee Group)—पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा और कस गया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सैकड़ों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और अनियमितताओं के मामलों में अपनी जांच और सक्रिय कर दी है। अंसल ग्रुप द्वारा साल 2003 से लेकर 2026 तक यानी पिछले 23 सालों में निवेशकों के साथ की गई कथित धोखाधड़ी और सरकारी संपत्तियों को हथियाने के मामलों पर अब सीबीआई का पूरा फोकस है।

सुशांत गोल्फ सिटी सहित कई प्रोजेक्ट्स निशाने पर
सीबीआई की इस जांच के केंद्र में अंसल का लखनऊ स्थित हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट ‘सुशांत गोल्फ सिटी’ और दिल्ली-एनसीआर के कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। गौरतलब है कि हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 2 साल पहले अंसल ग्रुप के खिलाफ शुरुआती जांच शुरू की थी। इस दौरान जांच एजेंसी को निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने के अलावा नियमों को ताक पर रखकर तमाम बेशकीमती सरकारी संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा करने और उन्हें खुर्द-बुर्द करने के पुख्ता सबूत मिले थे। सीबीआई इस सिलसिले में अंसल और तुलसियानी कंस्ट्रक्शन एंड डवलपर्स के खिलाफ पहले ही एफआईआर (FIR) दर्ज कर चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक्शन में एजेंसियां
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद जहां सीबीआई ने अपना दायरा बढ़ाया है, वहीं वित्तीय अपराधों की जांच करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में समानांतर रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की बड़ी कार्रवाई की है। हाल ही में ईडी ने इस पूरे घोटाले और जमीन अधिग्रहण की अनियमितताओं से जुड़े मामले में अंसल ग्रुप की 598 करोड़ रुपये की संपत्ति भी कुर्क की है।

दिवालियापन (CIRP) की प्रक्रिया भी जारी
एक तरफ जहां आपराधिक और वित्तीय घोटालों की जांच सीबीआई और ईडी कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बैंकों और वित्तीय संस्थानों का बकाया न चुकाने के कारण अंसल प्रॉपर्टीज इस समय कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) यानी दिवालियापन के दौर से भी गुजर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को भी तेजी से चलाने के निर्देश दिए हैं ताकि पीड़ित घर खरीदारों (Homebuyers) को जल्द से जल्द राहत और कानूनी उपचार मिल सके।
सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब इस पूरे नेक्सस में शामिल कंपनी के प्रमोटर्स, अधिकारियों और सांठगांठ करने वाले सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की गहराई से स्क्रूटनी की जा रही है और जल्द ही इस मामले में कई नई गिरफ्तारियां और बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

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