मुस्तैदी और क्विक रिस्पांस की सराहना
इस हादसे में सबसे अच्छी बात यह रही कि ट्रेन के स्टाफ, लोको पायलट और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने समय रहते सूझबूझ दिखाई। चलती ट्रेन में आग लगने पर सबसे बड़ी चुनौती भगदड़ को रोकना और यात्रियों को सुरक्षित निकालना होता है। रतलाम से कोटा के बीच राजस्थान-मध्य प्रदेश बॉर्डर जैसे संवेदनशील इलाके में भी सभी 61 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना यह साबित करता है कि रेलवे का ‘इमरजेंसी इवैक्युएशन’ (आपातकालीन निकासी) सिस्टम और स्टाफ की ट्रेनिंग इस संकट के समय कारगर साबित हुई।
आधुनिक सुरक्षा तकनीक और एलएचबी (LHB) कोच
आजकल राजधानी जैसी ट्रेनों में पारंपरिक कोचों की जगह आधुनिक LHB (Linke Hofmann Busch) कोच का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन कोचों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि ये ‘एंटी-टेलीस्कोपिक’ होते हैं (यानी हादसे के वक्त एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते) और इनमें इस्तेमाल होने वाला मटेरियल काफी हद तक ‘फायर रिटार्डेंट’ (आग को धीमी गति से फैलने देने वाला) होता है। संभावना है कि इसी वजह से आग तुरंत दूसरे कोचों में नहीं फैली और यात्रियों को सुरक्षित निकलने का पर्याप्त समय मिल गया।
अभी कहाँ सुधार की है ज़रूरत?
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद, “एसी कोच में अचानक भीषण आग लगना” सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है, जिन पर रेलवे को गहराई से काम करने की आवश्यकता है:
शॉर्ट सर्किट और मेंटेनेंस: अक्सर एसी कोचों में आग लगने की वजह इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट या ओवरहीटिंग होती है। रेलवे को अपनी ‘प्रिवेंटिव मेंटेनेंस’ (नियमित जांच) को और अधिक सख्त करना होगा ताकि यात्रा शुरू होने से पहले ही कमियों को पकड़ा जा सके।
यात्रियों की जागरूकता: कई बार यात्री ट्रेनों में प्रतिबंधित वस्तुएं (जैसे ज्वलनशील पदार्थ) ले जाते हैं या मोबाइल चार्जिंग पॉइंट का गलत इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए स्टेशनों पर और अधिक कड़ाई से चेकिंग होनी चाहिए।
स्वचालित अग्निशमन प्रणाली: हालांकि नई ट्रेनों में फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर लगाए जा रहे हैं, लेकिन सभी एसी कोचों में स्वचालित आग बुझाने वाले सिस्टम (Automatic Fire Suppression Systems) को और अधिक अपग्रेड करने की ज़रूरत है।
निष्कर्ष
सफर के दौरान सुरक्षा को लेकर रेलवे लगातार तकनीक में सुधार कर रहा है, जिसके सकारात्मक नतीजे इस हादसे में दिखे कि सभी 61 जानें बच गईं। हालांकि, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग के असली कारणों का पता चल सकेगा, लेकिन भविष्य में ऐसे हादसों को ‘ज़ीरो’ (शून्य) पर लाने के लिए तकनीक और मानवीय सतर्कता दोनों को और मजबूत करना होगा।
