ग्रेटर नोएडा/नोएडा: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को लेकर जो उम्मीदें किफायती सफर की थीं, आंकड़ों की नई बाजीगरी ने उन पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट की तुलना में जेवर एयरपोर्ट पर प्रस्तावित शुल्क (Charges) इतने अधिक हैं कि एयरलाइंस कंपनियों के साथ-साथ आम यात्रियों के माथे पर भी पसीना आ गया है।
आंकड़ों का खेल: दिल्ली vs नोएडा (UDF और अन्य शुल्क)
एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) को दी गई जानकारी के अनुसार, शुल्कों का अंतर चौंकाने वाला है:
जेवर एयरपोर्ट के संचालन से पहले जो आंकड़े सामने आए हैं, वे यात्रियों और एयरलाइंस दोनों के लिए चिंता का विषय हैं। सबसे बड़ा अंतर UDF (यूजर डेवलपमेंट फीस) में देखा गया है। जहां दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रियों के लिए यह शुल्क मात्र 129 रुपये है, वहीं जेवर एयरपोर्ट पर इसके 653 रुपये होने का प्रस्ताव है, जो कि दिल्ली के मुकाबले 406% अधिक है। इसका सीधा मतलब यह है कि नोएडा से उड़ान भरने वाले हर यात्री को टिकट के साथ एक बड़ी अतिरिक्त राशि चुकानी होगी।
इसके अलावा, विमानन कंपनियों के लिए भी जेवर का सफर महंगा साबित हो रहा है। 11 टन वजन वाले विमानों की लैंडिंग फीस दिल्ली की तुलना में 119% ज्यादा रखी गई है। विमानों को खड़ा करने यानी पार्किंग फीस की बात करें, तो जेवर में 6 घंटे के लिए 14,500 रुपये वसूले जाएंगे, जबकि दिल्ली में यह दर केवल 6,900 रुपये है। इन्ही भारी शुल्कों के कारण इंडिगो जैसी बड़ी कंपनियों ने आर्थिक व्यवहार्यता को लेकर सवाल उठाए हैं।
इंडिगो (IndiGo) ने जताई कड़ी आपत्ति
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने AERA को चिठ्ठी लिखकर अपनी असमर्थता जताई है। आंकड़ों के मुताबिक, इन बढ़े हुए शुल्कों के कारण सिर्फ इंडिगो को हर साल करीब 103 करोड़ रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। एयरलाइंस का कहना है कि इतने भारी बोझ के साथ उड़ानों का संचालन करना चुनौतीपूर्ण होगा।
क्या होगा आम यात्रियों पर असर?
जब एयरलाइंस को लैंडिंग, पार्किंग और UDF (User Development Fee) के रूप में ज्यादा पैसा देना होगा, तो वे इसकी भरपाई टिकट की कीमतों से करेंगी।
महंगा टिकट: दिल्ली के मुकाबले जेवर से उड़ान भरना काफी महंगा हो सकता है।
कनेक्टिविटी की चुनौती: अगर किराया ज्यादा रहा, तो यात्री बेहतर कनेक्टिविटी वाले दिल्ली एयरपोर्ट को ही प्राथमिकता देंगे।
यूपी सरकार की नीति और विरोधाभास
हैरानी की बात यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर वैट (VAT) घटाकर सिर्फ 1% कर दिया है ताकि उड़ानें सस्ती हों, लेकिन दूसरी तरफ एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर चार्जेस इतने ऊंचे रखे गए हैं कि टैक्स की राहत बेअसर साबित हो रही है।
विधायक भी उठा चुके हैं सवाल
हाल ही में जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन शुल्कों के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही जेवर दिल्ली से महंगा साबित हुआ, तो यह एयरपोर्ट के भविष्य के लिए ठीक नहीं होगा।
निष्कर्ष: जेवर एयरपोर्ट को ‘आम आदमी’ का एयरपोर्ट बनाने का दावा अब शुल्कों की फाइल में उलझता दिख रहा है। अब देखना यह है कि रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) इंडिगो की चिठ्ठी और जनप्रतिनिधियों की मांग पर क्या फैसला लेती है।
