जांच का दायरा बढ़ा: महर्षि संस्थान की जमीन बेचने वालों पर ED का शिकंजा, कई आरोपी गिरफ्तार

जांच का दायरा बढ़ा: महर्षि संस्थान की जमीन बेचने वालों पर ED का शिकंजा, कई आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ/नई दिल्ली: SRM फाउंडेशन ऑफ इंडिया (महर्षि महेश योगी संस्थान) की अरबों रुपये की जमीनों की अवैध बिक्री के मामले में अब जांच का दायरा बेहद व्यापक हो गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशेष जांच दल (SIT) के गठन के आदेश के बाद, अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस महाघोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा दर्ज कर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। ताजा जानकारी के अनुसार, ED ने इस फर्जीवाड़े और वित्तीय हेराफेरी से जुड़े कई मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ीं मुश्किलें
संस्थान के श्रीकांत ओझा द्वारा दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की निगरानी में SIT जांच का आदेश दिया था। अब ED की एंट्री ने इस पूरे नेक्सस में शामिल भू-माफियाओं, फर्जी खरीदार-बेचने वालों और कथित अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि करोड़ों-अरबों रुपये की जमीनों को अवैध रूप से बेचकर जो काला धन कमाया गया, उसे कहां और किन खातों में ठिकाने लगाया गया।

मुख्य सचिव और SIT करेगी फैक्ट फाइंडिंग
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज की मदद से संस्थान की उन सभी संपत्तियों की पहचान की जाए, जिन्हें बिना किसी वैध अनुमति के खुर्द-बुर्द किया गया। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसने पुलिस की जांच रिपोर्ट पर रोक लगाई थी। अब SIT और ED दोनों एजेंसियां मिलकर समानांतर रूप से इस बड़े भूमि घोटाले की परतें खोल रही हैं।

महर्षि की विरासत को खुर्द-बुर्द करने का आरोप
अदालत ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुकदमे लंबित होने के बावजूद संस्थान की संपत्तियों की अवैध बिक्री लगातार जारी रहना बेहद गंभीर और चिंता का विषय है। महर्षि महेश योगी ने जिस आध्यात्मिक और सामाजिक उत्थान के लिए इस संस्थान की आधारशिला रखी थी, उसे कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ और लालच के लिए खत्म करने पर तुले हैं।

तीन महीने में सौंपी जानी है रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार SIT को तीन महीने के भीतर अपनी विस्तृत फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी है। इसी बीच ED द्वारा की गई इन ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों ने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले में शामिल कई सफेदपोश और रसूखदार चेहरे बेनकाब होने वाले हैं। जांच अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे फर्जी दस्तावेजों के जरिए हुए हर एक बैंक ट्रांजैक्शन की गहराई से पड़ताल करें।

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