
देवरिया/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और देवरिया में पुलिस ने एक बड़े जाली नोट गिरोह का पर्दाफाश किया है। प्रयागराज पुलिस ने सोमवार को 1.18 लाख रुपये के नकली नोटों के साथ चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसके तार देवरिया के गौरी बाजार से जुड़े पाए गए हैं। इस मामले में मुख्य आरोपी और गिरोह का सरगना विवेक यादव फिलहाल फरार है, जिसे लेकर अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है।
कैसे हुआ भंडाफोड़?
प्रयागराज पुलिस को सूचना मिली थी कि सहसों चौराहे के पास नकली नोटों की सप्लाई होने वाली है। घेराबंदी कर पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा, जिनके पास से 500, 200 और 100 रुपये के जाली नोट बरामद हुए। पूछताछ में खुलासा हुआ कि नकली नोट बनाने की फैक्ट्री देवरिया के गौरी बाजार इलाके में विवेक यादव के घर पर चल रही थी। पुलिस ने छापेमारी कर वहां से लैपटॉप, प्रिंटर, कार और नोट बनाने के अन्य उपकरण बरामद किए हैं।
50 हजार के असली नोट पर 1 लाख के नकली
डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि गिरोह का नेटवर्क काफी संगठित था। आरोपी 50 हजार रुपये के असली नोटों के बदले 1 लाख रुपये के नकली नोट देते थे। इन नोटों को छोटे-छोटे बाजारों और ग्रामीण इलाकों में खपाया जाता था। मुख्य सरगना विवेक यादव जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ चुका है और इस बार भी वार्ड नंबर 16 से तैयारी में जुटा था।
सियासी घमासान: सपा बनाम भाजपा
विवेक यादव का नाम सामने आते ही समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
सपा का पक्ष: सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोपी को भाजपा का कार्यकर्ता बताया है।
भाजपा का पलटवार: देवरिया सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने पलटवार करते हुए विवेक यादव की सपा नेताओं के साथ तस्वीरें साझा की हैं और उसे सपा का सक्रिय नेता करार दिया है।
जिले के सोशल मीडिया ग्रुप्स पर दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता एक-दूसरे पर आरोपी को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे हैं।
“यह बेहद गंभीर मामला है कि एक राजनीतिक चोला ओढ़कर जाली नोटों का धंधा किया जा रहा था। आरोपी चाहे जो भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। सपा अपराधियों को पालने का काम करती रही है और यह मामला इसका प्रमाण है।” – शलभ मणि त्रिपाठी, विधायक, देवरिया सदर
