मॉस्को/नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण युद्ध को लेकर दुनिया को आगाह किया है। पुतिन ने इस संकट की तुलना कोरोना महामारी (COVID-19) से करते हुए कहा है कि इसके आर्थिक परिणाम उतने ही विनाशकारी हो सकते हैं, जितने 2020 की वैश्विक मंदी के दौरान थे।
‘जंग लड़ रहे देशों को भी नहीं पता अंजाम’
मॉस्को में बिजनेस लीडर्स को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि वर्तमान संघर्ष के प्रभावों का सटीक आकलन करना फिलहाल असंभव है। उन्होंने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा, “जो देश इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल हैं, उन्हें खुद भी नहीं पता कि इसका भविष्य क्या होगा और इसके नतीजे कितने गंभीर होंगे।”
किन क्षेत्रों पर पड़ेगा सबसे बुरा असर?
पुतिन ने रेखांकित किया कि यह केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स और उत्पादन की कमर तोड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से तीन क्षेत्रों पर भारी दबाव की बात कही:
हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस): ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल।
धातु (Metals): औद्योगिक उत्पादन में रुकावट।
उर्वरक (Fertilizers): वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर संकट।
क्यों की कोरोना से तुलना?
राष्ट्रपति पुतिन के अनुसार, जिस तरह कोरोना ने पूरी दुनिया की रफ्तार रोक दी थी और हर देश की अर्थव्यवस्था को घर के अंदर कैद कर दिया था, यह युद्ध भी वैश्विक विकास दर (GDP) को उसी तरह प्रभावित कर सकता है। सप्लाई चेन टूटने से महंगाई और बेरोजगारी का एक नया चक्र शुरू होने का खतरा है।
कूटनीतिक समाधान ही एकमात्र रास्ता
पुतिन के इस बयान से साफ है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो दुनिया एक बड़े ‘आर्थिक ब्लैकआउट’ की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि यह संकट किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर हर घर की रसोई और हर कंपनी के बैलेंस शीट पर पड़ेगा।

