
नई दिल्ली: देश के किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर है। पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी तनाव के कारण भारत के यूरिया प्लांट गहरे संकट में फंस गए हैं। तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई बाधित होने की वजह से देश के अधिकांश यूरिया प्लांट अपनी क्षमता से आधी यानी महज 50 प्रतिशत पर काम कर रहे हैं।
क्यों रुकी गैस की सप्लाई?
देश का सबसे बड़ा एलएनजी टर्मिनल ऑपरेट करने वाली कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने ‘अपरिहार्य स्थिति’ (Force Majeure) की घोषणा की है। दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण सप्लायरों ने भारत को अनुबंधित मात्रा में गैस देने में असमर्थता जताई है। इसके चलते गेल (GAIL), इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों ने खाद कंपनियों को दी जाने वाली गैस सप्लाई में 35 से 40 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है।
उत्पादन आधा, लागत में भारी बढ़ोतरी
प्लांट अधिकारियों के अनुसार, यूरिया बनाने वाले बड़े प्लांट कम लोड पर चलने के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए हैं। गैस कम मिलने से उत्पादन तो आधा रह गया है, लेकिन कम लोड पर मशीनें चलाने की वजह से ऊर्जा की खपत 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। यह स्थिति उर्वरक कंपनियों के लिए सीधे तौर पर बड़े वित्तीय नुकसान का सबब बन रही है।
क्या खरीफ सीजन पर पड़ेगा असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उपभोक्ताओं में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गैस सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले खरीफ बुवाई सत्र से पहले यूरिया की किल्लत हो सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल भारत के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
मौजूदा स्टॉक की स्थिति:
19 मार्च तक यूरिया भंडार: 61.14 लाख टन
पिछले साल इसी समय स्टॉक: 55.22 लाख टन
भले ही पिछला स्टॉक साल भर पहले के मुकाबले बेहतर है, लेकिन उत्पादन में आ रही 50% की गिरावट लंबी खिंची तो संकट गहरा सकता है।
