पश्चिम एशिया संकट: ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत का ‘महाप्लान’, 70,000 करोड़ से बनेंगे स्वदेशी जहाज

पश्चिम एशिया संकट: ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत का ‘महाप्लान’, 70,000 करोड़ से बनेंगे स्वदेशी जहाज

पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत ने अपनी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में देश को संबोधित करते हुए घोषणा की है कि सरकार 70,000 करोड़ रुपये की लागत से एक विशाल स्वदेशी जहाज निर्माण परियोजना शुरू कर रही है।
इस रणनीतिक निर्णय का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल और गैस के आयात के लिए विदेशी जहाजों पर भारत की 90% निर्भरता को खत्म करना है।

विदेशी जहाजों पर निर्भरता एक बड़ा जोखिम
प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में स्पष्ट किया कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक तेल वर्तमान में विदेशी जहाजों के माध्यम से आता है। किसी भी वैश्विक युद्ध या अस्थिरता की स्थिति में यह निर्भरता भारत की आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए ‘मेड इन इंडिया’ जहाजों का निर्माण युद्ध स्तर पर शुरू किया गया है।

पीएम मोदी के संबोधन की मुख्य बातें:

आत्मनिर्भरता ही एकमात्र विकल्प: पीएम ने जोर देकर कहा कि हर क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना ही वैश्विक संकटों का एकमात्र समाधान है।
रणनीतिक तेल भंडार: भारत ने पिछले 11 वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन रणनीतिक तेल भंडार तैयार किया है, और 65 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त क्षमता पर काम चल रहा है।
शांति और कूटनीति: भारत पश्चिम एशिया में संवाद के जरिए शांति चाहता है और उसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों को खुला रखना है।
घरेलू उत्पादन: एलपीजी के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी सरकार बड़े पैमाने पर प्रयास कर रही है।

व्यापार और निवेश पर क्या होगा असर?
इस 70,000 करोड़ रुपये के निवेश से न केवल भारत की समुद्री शक्ति बढ़ेगी, बल्कि घरेलू शिपिंग उद्योग में रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। स्वदेशी जहाज निर्माण से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेशकों को मिलेगा।

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