तेहरान/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ बातचीत और कई मुद्दों पर सहमति बनने के दावों को ईरान ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका “फेक न्यूज” के जरिए वैश्विक तेल और वित्तीय बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
संसद अध्यक्ष का सख्त रुख: “कोई बातचीत नहीं हुई”
ईरानी संसद (मजलिस) के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने ट्रंप के दावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी स्तर पर औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। गालिबाफ के अनुसार, अमेरिका और इजरायल मौजूदा भू-राजनीतिक दबाव से बचने के लिए झूठी खबरें फैला रहे हैं ताकि बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा की जा सके और तेल की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
विदेश मंत्रालय ने साफ की स्थिति
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी इन दावों को सिरे से नकारते हुए कहा कि तेहरान के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि कुछ मित्र देशों के माध्यम से अमेरिका की ओर से बातचीत के संकेत मिले थे, लेकिन ईरान ने किसी भी आधिकारिक चर्चा में हिस्सा नहीं लिया है।
“हमलावर देशों को सजा मिलने तक पीछे नहीं हटेंगे”
ईरान ने अपनी पुरानी मांग को दोहराते हुए कहा है कि जब तक हमलावर देशों को उनके किए की सजा नहीं मिल जाती, तब तक ईरान अपने रुख में कोई नरमी नहीं बरतेगा।
बाजार और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके रणनीतिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर कोई हमला होता है, तो इसके परिणाम विनाशकारी होंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी ईरान की शर्तें बरकरार हैं। जानकारों का मानना है कि इस बयानबाजी का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र दुनिया की तेल आपूर्ति का एक मुख्य केंद्र है।
मुख्य बिंदु:
ट्रंप का दावा: ईरान के साथ बातचीत हुई और कई मुद्दों पर बनी सहमति।
ईरान का जवाब: ट्रंप के दावे सफेद झूठ, कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई।
आरोप: फेक न्यूज फैलाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार को प्रभावित करने की अमेरिकी चाल।
चेतावनी: ईरान के अहम ठिकानों पर हमला हुआ तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
फिलहाल, दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी और विरोधाभासी बयानों ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह तनाव युद्ध का रूप लेता है या कूटनीति का, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

