नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने साइबर अपराध के विरुद्ध एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने दो अलग-अलग ऑपरेशनों में 74 लाख रुपये से अधिक की ठगी करने वाले दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। जांच में एक ऐसे संगठित गिरोह का पता चला है जो फर्जी निवेश और शेयर मार्केट के नाम पर लोगों की जीवनभर की कमाई लूट रहा था।
पहला मामला: IPO और ट्रेडिंग के नाम पर 27.82 लाख की चपत
पहले मामले में ठगों ने शेयर मार्केट, IPO और OTC ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर एक व्यक्ति से 27.82 लाख रुपये हड़प लिए। पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी राहुल त्यागी (निवासी ग्रेटर नोएडा) को गिरफ्तार किया है।
क्रिप्टो और कैश का खेल: राहुल त्यागी टेलीग्राम के जरिए विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में था। वह ठगी की रकम को 10-12 अलग-अलग बैंक खातों के जरिए रूट करता था।
कमीशन का लालच: आरोपी को इसका भुगतान पहले क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में और बाद में कैश में मिलता था। पूछताछ में उसने कबूल किया कि इस खेल से उसने अब तक 15 लाख रुपये कमाए हैं।
दूसरा मामला: ‘म्यूल अकाउंट’ के जरिए 47 लाख की ठगी
दूसरे बड़े मामले में एक अन्य व्यक्ति से 47 लाख रुपये की ठगी की गई। इस मामले में पुलिस ने रिंकू (36 वर्ष), निवासी ग्रेटर नोएडा को दबोचा है। रिंकू इस गिरोह के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ (किराए का बैंक खाता) उपलब्ध कराने का काम करता था।
बैंक खातों की सेल: रिंकू ने अपने बैंक खाते और उनसे जुड़े सिम कार्ड मुख्य आरोपियों को सौंप दिए थे। जांच में सामने आया कि अकेले रिंकू के खाते में ठगी के 31.45 लाख रुपये आए थे।
लोकेशन छिपाने की साजिश: पुलिस से बचने के लिए आरोपी आगरा जैसे शहरों के होटलों में रुककर ठगी के ऑपरेशन को अंजाम देते थे।
तकनीकी शातिरता: रिमोट ऐप्स और फर्जी सिम
पुलिस जांच में सामने आया कि ये ठग पुलिस की नजरों से बचने के लिए रिमोट कंट्रोल ऐप्स का इस्तेमाल करते थे, जिससे वे सिम कार्ड को कहीं से भी ऑपरेट कर सकें। ठगी की रकम को तुरंत कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था ताकि उसे फ्रीज न किया जा सके।
“साइबर अपराधी अब अधिक संगठित होकर काम कर रहे हैं। वे विदेशी हैंडलर्स के इशारे पर भारतीय नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। राहुल और रिंकू की गिरफ्तारी से इस नेटवर्क के कई और राज खुलने की उम्मीद है।” – वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, क्राइम ब्रांच
