दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: नामी कंपनियों के नाम पर बिक रहे थे नकली ‘ब्रेक शूज’, क्राइम ब्रांच ने 3 को दबोचा

दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: नामी कंपनियों के नाम पर बिक रहे थे नकली ‘ब्रेक शूज’, क्राइम ब्रांच ने 3 को दबोचा

नई दिल्ली: सड़क सुरक्षा और वाहन चालकों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े रैकेट का दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने राजधानी के तीन अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर फर्जी ऑटो पार्ट्स बनाने और बेचने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में लगभग 10 लाख रुपये के नकली टू-व्हीलर पार्ट्स और भारी मात्रा में पैकिंग मटेरियल बरामद किया गया है।

तीन इलाकों में एक साथ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

​क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि दिल्ली के कुछ हिस्सों में नामी ऑटो कंपनियों के नाम पर नकली स्पेयर पार्ट्स का काला कारोबार चल रहा है। इसके बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से इंद्रलोक, झंडेवालान और मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया में एक साथ रेड की।

पैकिंग और स्टिकर देख असली भी खा जाए धोखा

​पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह इतना शातिर था कि वे न केवल नकली पार्ट्स तैयार करते थे, बल्कि उनकी पैकेजिंग और MRP स्टिकर भी हूबहू असली जैसे ही छापते थे। इससे आम ग्राहकों के लिए असली और नकली में फर्क करना लगभग नामुमकिन हो जाता था। खास तौर पर वाहनों के ब्रेक शूज जैसे संवेदनशील पार्ट्स नकली बेचे जा रहे थे, जो किसी बड़े सड़क हादसे का कारण बन सकते थे।

इन 3 आरोपियों की हुई गिरफ्तारी

​छापेमारी के दौरान पुलिस ने गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है:

  1. रियाजुद्दीन: गिरोह का सक्रिय सदस्य।
  2. अनिल कुमार: अवैध कारोबार में संलिप्त।
  3. अर्जुन कुमार: यह आरोपी नकली स्टिकर और प्रिंटिंग यूनिट का काम संभालता था।

बरामदगी का विवरण

​पुलिस ने छापेमारी के दौरान सामान का बड़ा जखीरा बरामद किया है:

  • 1040 जोड़ी नकली ब्रेक शूज।
  • 14,000 फर्जी MRP स्टिकर।
  • 67,000 से ज्यादा नकली प्लास्टिक पैकिंग और 400 डिब्बे।
  • 50 बंडल पैकिंग मटेरियल और एक पूरी प्रिंटिंग यूनिट।

नेटवर्क की जांच जारी

​क्राइम ब्रांच ने तीनों आरोपियों के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह नकली माल दिल्ली के अलावा अन्य किन राज्यों में सप्लाई किया जा रहा था और इस सिंडिकेट के तार कहाँ-कहाँ जुड़े हैं।

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