नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसी शातिर महिला को गिरफ्तार किया है, जो पिछले कई सालों से राजधानी के प्रमुख अस्पतालों और मंदिरों के बाहर मासूम महिलाओं को अपनी ठगी का शिकार बना रही थी। आरोपी महिला पिछले 3 साल से फरार चल रही थी और अदालत ने उसे भगोड़ा (P.O.) घोषित कर दिया था।
भावुक कर और डराकर लूटती थी गहने
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। आरोपी महिला खासतौर पर उन महिलाओं को निशाना बनाती थी जो अस्पताल में इलाज के लिए आती थीं या मंदिरों में पूजा करने अकेली पहुँचती थीं।
- भरोसा जीतना: आरोपी महिला पहले अपनी दुखभरी कहानी सुनाकर या मदद का झांसा देकर महिलाओं का विश्वास जीतती थी।
- अशुभ का डर: वह महिलाओं को किसी अनहोनी या ‘अशुभ’ घटना का डर दिखाकर उन्हें मानसिक रूप से भ्रमित कर देती थी। इसी दौरान वह उन्हें गहने उतारने के लिए मजबूर करती और मौका मिलते ही कीमती सामान लेकर चंपत हो जाती थी।
50 से ज्यादा CCTV फुटेज और 1 महीने की मेहनत
इस गिरोह तक पहुँचने के लिए क्राइम ब्रांच ने पिछले एक महीने में दिल्ली के विभिन्न इलाकों के करीब 50 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले। तकनीकी निगरानी और जमीनी खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया। आखिरकार, 9 अप्रैल 2026 को क्राइम ब्रांच ने आरोपी को बवाना इलाके से धर दबोचा।
कौन है आरोपी पारो?
गिरफ्तार महिला की पहचान पारो (38 वर्ष) के रूप में हुई है, जो बवाना की जे.जे. कॉलोनी में रहती है।
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: आठवीं तक पढ़ी पारो की शादी 2012 में हुई थी और उसके तीन बच्चे हैं।
- अपराध की वजह: पूछताछ में उसने बताया कि आर्थिक तंगी और पारिवारिक कलह के कारण उसने अपराध का रास्ता चुना और धीरे-धीरे ठग गिरोह की मुखिया बन गई।
दर्ज हैं कई मुकदमे
पारो के खिलाफ दिल्ली के विभिन्न थानों में पहले से ही कई मामले दर्ज हैं:
- मंदिर मार्ग थाना: ठगी और धोखाधड़ी का मामला।
- आई.पी. एस्टेट थाना: अस्पताल के पास महिलाओं से लूट।
- एलएनजेपी अस्पताल (2023): एक महिला से लाखों के गहने ठगने की वारदात।
पुलिस की अपील
क्राइम ब्रांच ने लोगों, विशेषकर महिलाओं से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर अनजान लोगों की बातों में न आएं और न ही किसी के कहने पर अपने गहने या कीमती सामान उन्हें सौंपें। फिलहाल पुलिस पारो के अन्य साथियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

