विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ वर्षों में वैश्विक तापमान में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिलेगी, जिससे न केवल गर्मी के पुराने रिकॉर्ड टूटेंगे, बल्कि जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाएंगे।
क्या कहती है WMO की रिपोर्ट?
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु भविष्य की चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं:
तापमान में वृद्धि: 2026 से 2030 के बीच, वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक पूर्व स्तर (1850–1900) से 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहने का अनुमान है।
1.5 डिग्री की दहलीज: इन पाँच वर्षों के दौरान औसत तापमान के 1.5 डिग्री सेल्सियस की महत्वपूर्ण सीमा को पार करने की संभावना 75 प्रतिशत है। इसके अलावा, 91 प्रतिशत संभावना है कि इन पाँच वर्षों में कम से कम एक वर्ष ऐसा होगा जो अस्थायी रूप से इस सीमा को लांघ जाएगा।
अल नीनो का प्रभाव: 2026 के अंत में ‘अल नीनो’ (El Niño) के सक्रिय होने की संभावना है, जो 2027 में तापमान के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता है। याद दिला दें कि 2023 और 2024 की भीषण गर्मी में अल नीनो ने अहम भूमिका निभाई थी।
आर्कटिक और वैश्विक मौसम पर असर
रिपोर्ट के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक औसत की तुलना में कई गुना अधिक गति से गर्म हो रहा है। इसके साथ ही, दुनिया भर में बारिश और सूखे के अनिश्चित पैटर्न मानव जीवन और खाद्य सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा करेंगे।
निष्कर्ष: क्या अभी भी संभलने का समय है?
विशेषज्ञों का मानना है कि पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को लंबे समय तक सुरक्षित रखना अब एक कठिन लक्ष्य बनता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन की यह वर्तमान गति न केवल ऊर्जा नीतियों, बल्कि वैश्विक पर्यावरण रणनीतियों पर भी तत्काल और कठोर बदलाव का दबाव बना रही है।
आने वाला समय न केवल विज्ञान, बल्कि नीति-निर्धारकों और आम जनता के लिए भी सतर्क रहने का है, क्योंकि प्रकृति के बदलते मिजाज अब केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं।

